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उज्जैन जिले का परिचय

२६ जनवरी ‌ १९७७ से निर्मित उज्जैन संभाग में उज्जैन जिला मध्यप्रदेश के पश्चिमी भाग में स्थित है। ये जिला पूर्व में पश्चिम की ओर लगभग १५५ किलोमीटर लंबे और उत्तर से दक्षिण की ओर लगभग ८० किलोमीटर है। जिले में उज्जैन, खाचरौद, बडनगर, महिदपुर, तराना और घटिया कुल ६ विकासखण्ड है। जिले का भू-भाग मालवा पठार का ही एक भाग है। चामला, गंभीर, चंबल, क्षिप्रा, और काली सिंध जिले की प्रमुख नदिया है। इन सभी नदियों का बहाव उत्तर दिशा कि और है।

जिले की जलवायु समशीतोष्ण है। इस जिले में वन क्षेत्र बहुत कम है। जिले में तालाबों, कुओं, नहरों तथा ट्यूबवेलों से कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। जिले में काली मिट्टी का बाहुल्य है जो उपजाउ है। जिले में रबी एवं खरीफ दोनो ही मौसम की फसलें पैदा की जाती है। 

औद्योगिक दृष्टि से जिले में छोटे-छोटे सैकडों कारखाने है। नागदा में प्रमुख कारखाने स्थापित है। इन कारखानों में कृत्रिम रेशा बनाया जाता है। लघु उद्योग में उज्जैन नगर की कुंकुम एवं मेहंदी उद्योग प्रसिद्ध है। वस्त्रों के छपाई-रंगाई के लिए भैरवगढ़ उज्जैन नगर का प्रसिद्ध स्थान है। यहां के छपाई वस्त्र विदेशों को निर्यात किये जाते है।

उज्जैन जिला सांस्कृतिक दृष्टि से संपन्न जिला है। नगर उज्जैन एक पौराणिक नगर है। पुरातत्वीय प्रमाणों के आधार पर यह नगर ३००० वर्ष पुराना है। सांस्कृतिक विरासत जिले की समस्त तहसीलों में बिखरी पड़ी है। इन तहसीलों में पौराणिक काल से लेकर आधुनिक युग के सांस्कृतिक स्वरूप के दर्शन होते है। यहां के सांस्कृतिक उत्सव में अखिल भारतीय कालीदास समारोह के साथ ही तीज त्यौहार व सवारियों का विशेष महत्व है। गणगौर तीज, महादेव की सवारी, गोगानवमी, गणपति स्थापना - विसर्जन चहल्लुम का जुलुस आदि उल्लेखनीय है।

उज्जैन जिले का शैक्षणिक परिदृश्य
जिले का मुख्यालय प्राचीन काल से शिक्षा प्रशिक्षण का केन्द्र रहा है। यहां स्थित सांदीपनी आश्रम में स्वयं भगवान श्री कृष्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिये मथुरा से आये थे। अन्य ऐतिहासिक एवं पौराणिक पुरूषों में राजा अशोक व कवि कालिदास प्रमुख है, जिन्होने यहां विद्याअर्जन किया।
जिले में खाचरौद, महिदपुर, बडनगर, तराना, व नागदा के साथ-साथ उज्जैन में भी महाविद्यालयीन शिक्षा के केन्द्र स्थापित है। नगर उज्जैन में अभियांत्रिकी महाविद्यालय, स्नातकोत्तर शिक्षा महाविद्यालय एवं विक्रम विश्व विद्यालय  जैसी संस्थाएं स्थापित है। छात्र/छात्राओं के लिये नगर में अलग-अलग महिला एवं बाल आय.टी.आय. केन्द्र स्थापित हे। स्वास्थ शिक्षा के क्षेत्र में जिला चिकित्सालय उज्जैन में नर्सिंग प्रशिक्षण दिया जाता है इसके साथ ही मंगलनाथ रोड पर धनवंतरी आयुर्वेद महाविद्यालय भी है। नगर पटवारी प्रशिक्षण शाला, शिक्षा के क्षेत्र में शासकीय शिक्षा महाविद्यालय, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के अलावा अशासकीय शिक्षा संस्थान लोकमान्य तिलक महाविद्यालय, महाराजा कॉलेज, सरस्वती महाविद्यालय कार्यरत है। यहां पर अंर्तराष्ट्रीय स्तर के संस्थान कालिदास अकादमी एवं वेद विद्या प्रतिष्ठान शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे है। संस्कार एवं संस्कृति के लिये यहां संस्कृत महाविद्यालय संचालित है। जिसमें कर्मकाण्ड एवं धार्मिक के साथ-साथ संस्कृत साहित्य पर आधारित शिक्षा दी जाती है।

अन्ततः उज्जैयिनी का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक समग्र रूप में प्रस्तुत पंक्तियों द्वारा परिभाषित हो रहा है -

महिमा मण्डित महाकाल की गौरव गाथा उज्जयिनी
न्यायमूर्ति विक्रमादित्य की कीर्ति पताका उज्जयिनी ।
ज्ञानदायिनी सान्दीपनी की बुद्धिशलाका उज्जयिनी,
कालिदास की शकुन्तला सी आश्रम कन्या, उज्जयिनी।
धवल धार धारिणी क्षिप्रा तट धान्य सधन्या उज्जयिनी।

 

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